जिंदगी

सिमटती है,बिखरती है,

और न जाने कब ,

बिखरकर सिमट जाती है।

ये जिंदगी है जनाब,

ये यूँ ही हुआ करती है।

कभी धूप तो कभी छाँव,

रहा करती है।

पर ये जो भी हो न आपकी,

और न मेरी मर्जी बस ये तो,

रव की रहमत से चला करती है।

ये जिंदगी है जनाब,

ये यूँ ही हुआ करती है।

हौसले रखिये बस चलते रहिये,

आहिस्ता चलिये या फिर

रफ्तार से चलिये,कदमों

पर अपने भरोसा रखियें ।

जब भी चलिये कदमों के

नीचे जमीं जरुर रखिये ।

ये जिंदगी है जनाब,

ये यूँ ही हुआ करती है।

कभी धूप तो कभी छाँव

रहा करती है।

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