माँ

माँ ओ मेरी प्यारी माँ,

ममता की मूरत मेरी माँ,

जो कभी रव मुझे मिले,

ख्वाहिश मेरी मुझसे पूँछे,

बस तुझे हर जनम माँगू,

तेरी ही छाँव चाहूँ,

माँ ओ मेरी प्यारी माँ,

ममता की मूरत मेरी माँ,

रव का वरदान मेरी माँ,

चाहे दूर रहे या पास रहे,

हर वक्त तेरा ही ख्याल रहे,

कैसे भूल जाँऊ तुम्हें माँ,

रगों मे बहता खून तेरा ही,

माँ ओ मेरी प्यारी माँ,

ममता की मूरत मेरी माँ,

परछाई भी अगर साथ छोड़े,

पर माँ की दुआँ मेरे साथ रहे,

संतान का पालन करने को,

हर रुप धरा तुमने,

कभी दुर्गा ,काली बनी,

कभी सरस्वती,अन्नपूर्णा बनी,

माँ ओ मेरी प्यारी माँ,

ममता की मूरत मेरी माँ।

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