इम्तिहान

बचपन मे जब इम्तिहान,
दिया करते थे,
सुने हुये हर शब्दों को,
याद रखा करते थे,
अब जिंदगी के इम्तिहान,
दिया करते है,
मन को व्यथित करते,
कई शब्दों को अक्सर,
भूल जाया करते है,
मै कहूँ या न कहूँ,
पर हर इंसा जीवन मे,
शब्दों को अक्सर,
भूल जाया करते है,
रिश्तों को निभाने के लिये,
अपनो को पाने के लिये,
अक्सर सुने हुये शब्दों
को भूल जाया करते है,
जिन किताबों के सफे
भी याद हुआ करते थे,
इम्तिहान की तैयारी पर
खुश हुआ करते थे,
पर अब जिंदगी मे,
कई सफे यूँ ही बंद,
कर दिया करते है,
और खुश हुआ करते है,
मै कहूँ या न कहूँ,
हर इंसान जीवन मे ,
शब्दों को अक्सर,
भूल जाया करते है,
सचमुच जिंदगी के इम्तिहान
अजीब हुआ करते है,
सुने हुये शब्दों को भूलकर
ही अक्सर इम्तिहान
दिया करते है,
सच से जुड़े इम्तिहान
हुआ करते है।

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24 Comments

  1. बड़ी सटीक बात लिख दी आपने –
    अब जिंदगी के इम्तिहान दिया करते है हम सब….

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    1. हाँ जी किताबों के हर शब्द ज्ञानवर्धक होते है।पर जीवन मे जरूरी है कि जो शब्द हमें अच्छी दिशा मे प्रेरित करें, बस उन्हें याद रखा जाये।☺👍

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