सखियों को समर्पित

यूँ ही हँसती रहो,
मुस्कुराती रहो,
मुस्कुराहट ही तो
तुम्हारी साहस,
सौम्यता,उत्साह,
आत्मविश्वास,धैर्य,
का परिचायक है,
हजारों शब्दों मे भी
जो न कह सके,
बस सखी यही,
मुस्कुराहट ही तो,
नारी की ताकत है,
चमक उठे घर-द्वार,
जो हल्दी लगे हाथ,
छाप छोड़ गये,
प्यार से जो सीचीं
तुमने तुलसी क्यारी,
मंगल-कामना घर
के लिये है तुम्हारी,
तुम्हारे गजरा संग,
महकी आँगन की
फुलवारी,
हजार सपनों से जो
भरी रंगोली,
आगन भी यूँ दमके,
चाँद-सितारों संग,
और भी चमके,
पायल की छन-छन,
गूँज उठी किलकारी,
मुस्कुराओ सखी कि,
तुमसे ही तो है  घर-द्वार,
हजारों खुशियाँ न्योछावर,
जहाँ हो तुम्हारा संसार।

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