तिल गुड़ की मिठास

आओ यादों का पिटारा,
फिर खोल लेते है,
बचपन को फिर से,
याद कर लेते है,
तिल-गुड़ की मिठास,
और माँ के हाथो का,
स्वाद याद कर लेते है,
आओ यादो का पिटारा,
फिर से खोल लेते है,
ठिठुरती सी ठंड मे,
सुनहरी सी धूप मे,
उड़ाई हुई ,लपकी हुई,
पतंगो को फिर से,
याद कर लेते है,
वो जिंदगी मे मिठास,
घोलते हुए गड़िया गुल्ले,
साँचो मे ढले रंग-बिरंगे,
शक्कर के हाथी-घोड़े,
आज फिर से चख
लेते है,
यादो का पिटारा आज
फिर से खोल लेते है,
वो साँझा होती हुई,
टिफिन की मिठाईयाँ,
फिर से याद कर लेते है,
तिल-गुड़ की मिठास,
याद कर लेते है,
वो रौनक से भरे मेले ,
घूम लेते है,
पतंगो संग आसमां,
को छू लेते है,
खुशियों के खजाने
को लूट लेते है।

Advertisements

5 विचार “तिल गुड़ की मिठास&rdquo पर;

टिप्पणियाँ बंद कर दी गयी है।