खामोशी

खामोशियाँ भी बातें
किया करती है,
जुबाँ पर शब्द भले
न हो,
अपनों से बातें भले
न हो,
पर खुद से ही बातें
होती है ,
और यूँ तो मै बहुत,
बातें किया करती हूँ,
पर कभी-कभी,
खामोश भी रहा ,
करती हूँ,
कभी-कभी खुद से,
भी जो मिला करती हूँ,
मेरी खामोशियाँ भी,
मुझे कभी-कभी भाँ
जाती है,
मुझे मेरे करीब जो,
लाती है,
जब कभी खुशी या
गम हो,
अंर्तमन मे द्वन्द हो,
अनसुलझे से प्रश्न हो,
या फिर खोजनी
अपनी खामियाँ हो,
हाँ मै भी खामोश हो
जाया करती हूँ,
अपने लिये भी जियाँ
करती हूँ,
और जब भी टूटती
है खामोशियाँ,
पाती हूँ नई उर्जा,
उत्साह, मुस्कुराहट,
फिर से इक बार।

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