मुद्दतो बाद

मैं भूल नही सकती,
हर वो लम्हें,
जो वो मेरे करीब होते है,
उन्हें क्या पता कि बड़ी
शिद्दत से उन्हें चाहा मैने,
बड़ी मुद्दतो बाद उन्हें,
मैने मेरे करीब देखा है,
जाने क्यों हर लम्हा इक,
नई साज छेड़ देता है,
बेजार थे जो वो मुझसे,
रुठी सी थी गजल मुझसे,
बड़ी मुद्दतो बाद उन्हें,
मैने मेरे करीब देखा है,
यूँ तो रोज हम मिला
करते थे उनसे,
पर खो गये थे कही
अक्स-ए-दिल उनके,
जो आइने से साफ
नजर आते थे मुझे,
बड़ी मुद्दतो बाद उन्हें,
मैने मेरे करीब देखा है,
क्याँ कहूँ ,कैसे पूछूँ,
जाने क्यों वो बेजार
से थे मुझसे,
यूँ जो करीब है मेरे,
छुपा लू दामन मे कही,
इससे पहले कि वो,
दूर हो मुझसे,
बड़ी मुद्दतो बाद उन्हें,
मैने मेरे करीब देखा है।

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