बाँके-बिहारी

कृष्ण की लीला,
जग मे न्यारी,
भक्तों ने पुकारा,
दौड़े चले आये,
बाँके -बिहारी,
मीरा की भक्ति,
राधा की प्रीत,
रुक्मनि के मीत,
ग्वालो के सखा,
बन गये बिहारी,
जिस भाव से,
हरि को पूजा,
वैसे बन गये बिहारी,
भक्तों की पुकार पर,
दौड़े चले आये बिहारी,
भक्तों के भाव से,
बंध गये बिहारी,
यशोदा मैया ने,
हरि को पुकारा,
बाल-गोपाल बन
गये बाँके-बिहारी,
बस भाव के भूँखे,
जग के त्रिपुरारी,
जग को अगुँलियो
पर नचाते है बिहारी,
पर गोपियो ने नचाया,
तो नाच गये बिहारी,
भक्तों के भाव से,
बँधे है बिहारी।

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