नींद

ए नींद गहरे आगोश मे
ले मुझे अपने,
चंद ख्बाब अभी बाकी है,
कल सुबह तो जरूर होगी,
पर कुछ पहर सुबह के
अब भी बाकी है,
रिमझिम सी बारिश है,
सोये है चांद-सितारे भी,
ए नींद गहरे आगोश मे,
ले मुझे अपने,
चंद ख्वाब अभी बाकी है,
कल सुबह फिर जरूर होगी,
पंछी आशियाना छोड़ कर,
मुक्त नील-गगन मे उड़ान
फिर से भरेगे,
लाली लिये सूरज फिर से
दमकेगा,
पर ए नींद गहरे आगोश मे,
ले मुझे अपने,
चंद ख्वाब अभी बाकी है,
कल सुबह सूर्य-रश्मियाँ,
फिर से मुस्कुरायेगी और
खिलखिलायेगी,
सुबह के सत्कार मे पलके
भी बिछायेगीं,
दहलीज पर खड़ी खुशियाँ,
फिर से मुझे बुलायेगीं,
पर ए नींद गहरे आगोश मे,
ले मुझे अपने,
चंद अधूरे ख्बाब अभी भी,
बाकी है,
सुबह के कुछ पहर अभी
बाकी है,
कल सुबह तो जरूर होगी,
कुछ ख्वाबों मे सुनहरे रंग
फिर से भरेगें,
पर ए नींद गहरे आगोश मे,
ले मुझे अपने,
इक नई सुबह, खूबसूरत सी,
जिंदगी के लिये,
इस अधेंरी सी रात का गुजरना,
अब भी बाकी है।

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