कविता

किसी द्रुतगामी रेल सा,
भागता हुआ वक्त,
स्टेशन पर मिलते हुए लोग,
पटरियों पर भागती जिंदगी,
कभी रफ्ता-रफ्ता,
कभी तीव्र गति से,
कई रिश्ते बनते,
तो कई बिगड़ते,
चलता हुआ जिंदगी
का सफर,
पीछे छूटी हुई ढेरो
खट्टी-मीठी यादें,
सफर संग हर मोड़
पर मिलते ,
खुशी और गम,
खिड़की से नजर
आते नजारे,
हकीकत के समीप,
शांत और स्थिर,
प्राकृतिक ,
हम सच से परे,
बस वक्त संग भागते
हुए,
खुद से भी कोसों दूर,
अंर्तमन से आती हुई
सदाओ से दूर,
बिछड़ती हुई भावनायें,
छूटती सी इंसानियत,
अहसासो से कोसो दूर,
बस रह जाते है कुछ,
किस्से-कविताएं,
मधुर गाने, लेख,
मानवता के करीब,
पटरियों पर जिंदगी,
जोड़ने के प्रयास मे,
जीने का मकसद याद
दिलाते,
दूर मंदिर से आती
घंटे की आवाज सी,
आत्मा झंकृत करती हुई,
जिंदगी के सफल सफर
के प्रयास मे,
निरंतर बहती हुई कविताएं।
आत्मानुभूति कराती हुई
कविताएं,
जीवन से जुड़ी आत्म
-मंथित कविताएं।

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10 Comments

  1. आपने जीवन का फलसफा ही बया कर दिया है , अपनी प्यारी सी कविता में. पढ कर अच्छा लगा.

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