जश्न-ए-ईद

काली घटाओ का,
उमड़ना,
चाँद का सितारों संग,
छिप जाना,
मुकम्मल न था,
हँसीन चाँद का,
यूँ फलक से,
जमी पर आना,
वो शाम समा ही,
कुछ और था,
रुह रौशन,
नूर-ए-चमन रौशन,
कि हँसी चाँद रौशन,
मुकाबला तो न था,
और चाँद फलक से,
जमी पर था,
किसी रूह की फरियाद,
गरीब की नमाज,
बरसते आँसुओ की,
बस और बस खुदा,
से फरियाद,
और चाँद फलक से,
जमी पर था,
वो ईद की गले मिलकर,
मुलाकात बस,
और चाँद फलक से ,
जमी पर था,
वो बच्चों की ईदी
का त्योहार,
मासूम सी मुस्कान,
और चाँद फलक से,
जमी पर था,
रुह रौशन, चमन रौशन,
नूर रौशन, चाँद रौशन,
महक-ए-धूप से,
इत्र से, मजार रौशन,
और चाँद फलक से,
जमी पर था,
रूह-ए-सदा कबूल थी,
और चाँद फलक से,
जमी पर था।
जश्न-ए -ईद ,
शबाब पर था,
और चाँद फलक से,
जमी पर था।
रमजान-ए-पाक था,
रोजो का त्योहार था,
और चाँद फलक से,
जमी पर था।

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