झलक

उमंगों भरा,
शरारती बचपन जब,
बारिश मे नाचता है,
तब बूंदें भी उनकी,
नजर उतारती होगी,
बचपन संग मुस्कुराती,
खिलखिलाती,
गुनगुनाती होगी,
बारिश संग खिलती,
झलक- ए- सुबह,
सभँल कर चलती,
बच्चों से भरी बस,
शीशों पर गिरती,
सभँलती हुई बूंदें,
नन्हे से हाथो में,
मोती बनकर शरारत
से बिखरती हुई बूंदें,
बस रुकने पर ,
फुहारो संग कभी,
भीगते-सभँलते हुए,
बस्ते से,कभी हाथ से,
बारिश को थामते हुए,
कक्षा मे जाते हुए बच्चे,
और पैदल चलते हुए,
रंगबिरंगे छातों मे,
नजर आते हुए,
थामी हुई अंगुली को,
छोड़कर भीगने को,
मचलते हुए बच्चे,
सड़को मे भरे पानी मे,
छप से मचलते हुए,
बचपन याद दिलाते
नटखट बच्चे।

Advertisements

5 Comments

Comments are closed.