बारिश ए शहर

समुंदर का शहर,
और बरसता पानी,
कभी जम से और
कभी छम-छम
बरसता पानी,
भीगा-भीगा मौसम,
बालकनी से नजर
आती बूंदों की बौछार,
पंख लगा के उड़ती
सी सुबह,
चाय की चुस्कियाँ,
और आँखों से इजहार,
यूँ ही भागते से शहर
की कहानी,
सँवरती सी वो बारिश
की शाँमें,
और ढलती सी रात,
रिमझिम सी फुहार,
टिमटिमाती हुई सड़कें,
और घंटों बालकनी मे
इंतजार,
रुठती-मनाती रातें,
गजरे सी महकती रातें,
यूँ ही कब ढल जाती,
सपनों के शहर की रात,
बारिश सी बरसती वो रात।

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