सूखा मध्यप्रदेश

मंदिर मे,
भजन होते दिन-रात,
भक्त करे है पुकार,
जाने क्यूँ रुठे है मेघराज,
गाओ अब मेघ-मल्हार,
कि बरसे मेघा दिन-रात,
अपकी बार हरियाये न वन,
आने को है सावन पर,
सूखे से है घर-आँगन,
जाने क्यूँ रुठे है मेघराज,
सूख गये खेत-खलिहान,
उदास बैठे है किसान,
क्यूँ रुठे हो मेघराज,
सूखे है ताल-नदियाँ,
प्यासी सी बकरियाँ,
खूँटे से बँधी गैया,
घास-चारे को परेशान,
जाने क्यूँ रुठे हो मेघराज,
कागज की नाव भी जोहे
है बाट,
कि अब तो बरसो मेघराज,
खाली सी मटकियाँ लिये
कोसों चले कदम,
परेशान सी पगडंडियो
पर चले है नार,
खाली सी गाँव की दुकान,
न बरसे है पानी,
बरसाती, छत्ते वाले भैया
परेशान,
अब तो बरसो मेघराज,
रोजी-रोटी की फिकर मे,
सब है हैरान-परेशान।

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