ख्याल

बरसते बादल संग,
आयी यादों की सौगाते,
याद आती कहानियाँ,
कुछ कही, कुछ अनकही,
उमड़े थे बादल तब भी,
घुमड़े थे ख्याल तब भी,
कहा था मैने,
बादल थमो जरा,
सुनो प्रीत की बात जरा,
तुम जो जाओगे उनके पास,
सौगात मेरी भी ले जाना,
चंद बूंदों को बरसा देना,
जो वो मुस्कुराये,
ख्यालो मे डूब जाये,
सुंकून मुझे भी आये,
बरसे वो उधर,
आँखें बरसी थी इधर,
बड़ी लंबी थी वो रात,
बारिश की वो रात।

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6 thoughts on “ख्याल

  1. सुंदर कविता हैं. आपके पेज का बैंगनी रंग भी अच्छा लगा. पेज का रंग कैसे बदलते हैं ?

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      1. धन्यवाद शालिनी. मैं भी प्रयास करती हूँ. बताने के लिये शुक्रिया.😊

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