मेघ

ओ रे बदरा,
बरसे हो अरसो बाद,
आये हो मनुहारो के बाद,
इतना बरसो,जम से बरसो,
भीगी-भीगी लगे धरती,
मन भाये सौंधी सी महक,
भीगा-भीगा लगे चमन,
मोर नाचे है वन-वन,
होकर मगन,
प्यासा पपीहा भी,
बूंद-बूंद भीगा,
भीगा-भीगा सा मन,
शीतल सा चमन,
बदरा संग उड़ता सा गगन,
रिमझिम फुहार बन बरसो,
भीगा-भीगा सा घर-आँगन,
खुशहाल सा चमन,
प्रीत बन बरसो,
भीगा-भीगा सा तन-मन,
वरदान बन बरसो,
खेत जोते है किसान,
देखो कितनी है लगन,
बोये है बीज,                                  
कब फूंटे है अंकुर,
बड़ी करी है जतन,
जम से बरसो,
छम-छम बरसो,
अमृत-बूंद बन बरसो,
भरे है ताल-तलैया,
बहते है झरने-नदियाँ,
सागर पर उमड़ते बदरियाँ,
गरज के बदरा बरसो,
सावन-भाँदो जम से बरसो।

                    

 
                           

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