अब तो बरसो प्यारे मेघा

सूरज तेरी धूप से,
पथरायी धरा की देह,
अब तो बरसो प्यारे मेघा,
देखो तुम बिन धरती रोये,
पत्ता-पत्ता सूख गये,
वन सारे जर्जर भये,
अब तो बरसो प्यारे मेघा,
देखो तुम बिन ठूट खड़े से रोये,
ताल-तलैया सारे सूखे,
जल-प्राणी कहाँ विलोप भये
अब तो बरसो प्यारे मेघा,
जल-बिन मछली रोये,
जीव-जंतु सब प्यासे हो गये,
अब तो बरसो प्यारे मेघा,
देखो तुम बिन मोर न नाचे कोये,
पिया का रस्ता देखे गोरी,
विरहा मन मे प्रीत है जागी,
अब तो बरसो प्यारे मेघा,
देखो तुम संग जग शीतल
होये।

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